हादसे………………….देवेश दीक्षित

दिन ब दिन बढ़ते हादसे

ये पैगाम दे रहे हैं

आ गया है घोर कलियुग

ये बता रहे हैं

 

थम रहीं है अब तो सांसें

दिल को न सुकून है

आ गया है घोर कलियुग

ये दिखा रहे हैं

 

जगह जगह पर होते हादसे

दिल को दहला रहे हैं

आ गया है घोर कलियुग

ये समझा रहे हैं

 

इंसानियत के बढ़ते फासले

भरोसा तोड़ रहे हैं

आ गया है घोर कलियुग

ये जता रहे हैं

 

दिन ब दिन बढ़ते हादसे

ये पैगाम दे रहे हैं

आ गया है घोर कलियुग

ये बता रहे हैं

………………………..

देवेशदीक्षित

7982437710

 

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