कलियुग का प्रकोप………………………..देवेश दीक्षित

दूध की नदियां बहती थीं कभी

अब खून की नदियां बहती हैं

प्रेम भाव था भाईयों में कभी

अब चाकू-छुरियां चलती हैं

धन संपदा जमीन नारी

जब हुआ करती थीं परदे में

अब खुलकर है आ गईं सारी

कसर न छोड़ी झगड़े में

कलियुग का है प्रकोप सारा

इस ने लिया है लपेटे में

मनुष्य तो है बस माध्यम बेचारा

घसीटा उसको अंधेरे में

तेरा – मेरा की लड़ाई कभी

खत्म न होगी जमाने में

ईश्वर भी सोचता होगा कभी

क्या गलती हुई इंसां बनाने में

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देवेश दीक्षित

7982437710

 

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  1. vijaykr811 27/03/2021

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