मोहरा – अरुण कुमार झा बिट्टू

उनकी ससो की सरगम पर गुनगुना लिया मैने।
वो हो गये मेरे ये वहम पल लिया मैने।
पर वो तो फरेब था एक सतरंज का खेल था ।
एक रोल था प्यादे का और निभा लिया मैने।

Leave a Reply