बेटी

मेरे इस हथेली में समा जाती थी,
पोपले मुंह से मुस्कराकर मेरा हर
ग़म,हर थकन मिटा देती थी ।
एक दिन नन्हें हाथो और नन्हें पैरों से
इस हथेली में चलते चलते गिर पड़ी ,
मै झुकता,इससे पहले वो खड़ी हो गई ,
बोली -मत झुकिये आप,
मै बड़ी हो गई ॥

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  1. Nidhi 29/01/2021

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