हम सब थोड़े से टूटे हैं

है पूरा जुड़ा तो कोई नहीं,
हम सब थोड़े से टूटे हैं |
कुछ ग़म है अपने साथ लिए,
और कुछ जो पीछे छूटे हैं |

हर दिल में कोई दास्ताँ,
जो लबों तक आकर रुकी सी है |
कुछ धुंधली-धुंधली यादें हैं,
आँखों में जो छुपी सी हैं |

हैं दिल पर छाले ताज़े से,
जज़्बात भी हैं लहू-लुहान |
थक-हार के बैठे डाली पे,
भूल कर ऊंची उड़ान |

तो क्या गर हम टूटे हैं,
दिल आज भी एक परिंदा है |
गिर-गिर कर भी उठते हैं,
हौसले हमारे ज़िंदा हैं |

है पूरा जुड़ा तो कोई नहीं,
हम सब थोड़े से टूटे हैं |
कुछ ग़म है अपने साथ लिए,
और कुछ जो पीछे छूटे हैं |

4 Comments

  1. kiran kapur gulati 29/01/2021
    • Garima Mishra 30/01/2021
  2. D Seetharam 01/02/2021
    • Garima Mishra 02/02/2021

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