बसंत आने को है – डी के निवातिया

बसंत आने को है

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दीपशिखा के चंचल चरण
करने चले है फागुन वरण
शीतल ज्वाला  से अपनी
सौरभ मधु बरसाने को है
सुना है ! बसंत आने को है !!

हर इक मन में उमंग प्रवाह
शीतलता करती मधुर दाह
मनभावन सौंदर्यता से अब
मनवा मधुर लुभाने को है
सुना है ! बसंत आने को है !!

अमवा के  अंकुर पनपने लगे,
पुष्प टेसू, सरसों खिलने लगे,
नए दौर के नए किस्से देकर,
पुरानी पाती विदा होने को है
सुना है ! बसंत आने को है !!

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डी के निवातिया

4 Comments

  1. kiran kapur gulati 29/01/2021
    • डी. के. निवातिया 17/02/2021
  2. sukhmangal singh 17/02/2021
    • डी. के. निवातिया 17/02/2021

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