नूतन पल – डी के निवातिया

नूतन पल

नूतन पल, बेला नई, नवल किरण की भोर !
आशा दीपक जल उठे, तन मन हुआ विभोर !!
तन मन हुआ विभोर, नयन कँवल विहग जागे !
सुन भ्रमर का गान, कलियों की नींद भागे !!
कहत धरम कविराय, अनमोल है जीवन फल!
लीजिये पग पसार, कठिन मिलते नूतन पल !!

डी के निवातिया

6 Comments

    • डी. के. निवातिया 28/01/2021
  1. LOKESH 21/01/2021
    • डी. के. निवातिया 28/01/2021
  2. LOKESH 21/01/2021
    • डी. के. निवातिया 28/01/2021

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