नया साल – डी के निवातिया

नया साल
नए साल के जश्न में, बात नहीं वो शेष !
बीमारी से आज तक, जूझ रहा है देश !!
जूझ रहा है देश, चिंता बहुत यह भारी !
दुनिया भर में आज, फैली है महामारी !!
कहे धर्म कविराय, सारा जगत भरमाया!
बनके सबकी ढाल, आज नया साल आया !!
डी के निवातिया

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