।। जीवन का सार ll

जीवन मे क्या खोया क्या पाया, समझ चौथेपन में आता है।
उपलब्धियों अनुप्लाधियों का लेखा जोखा, नजरों के सामने आता है ।।1।।
उपलधियों के उजले पक्ष से, यदि मानव हो जावे संतुष्ट ।
जीवन में घटित विषाद, कदापि न दे सकते मन को कष्ट ।।2।।
जीवन के बीते पलों का यदि, हम करें गहनता से विश्लेषण।
विश्लेषणकर्ता बन के विचारें, जीवन के गुजरे हुए क्षण ।।3।।
तो हम पाएंगे कि परमात्मा ने, कहीं न हमसे अन्याय किया।
जो कुछ हमसे लिया ईश्वर ने, उससे कहीं अधिक हमें दिया ।।4।।
कोई कहता उम्र के ढ़लते पड़ाव में, हमारा साथी कोई नहीं ।
सारा जीवन वारा जिनके लिए, रखा सरोकार उन्होंने नहीं ।।5।।
किसी को दुःख है, कल तक जो हमको ‘सर’ ‘सर’ कहते थे ।
दिन भर हमारे समक्ष, जो नतमस्तक रहा करते थे ।।6।।
अब सामने आने पर भी, वे हमसे कतराते हैं।
चन्द दिनों में ही लोग, कितना बदल जाते हैं ।।7।।
मेरा कहना है ऐ भाई, तुमने क्यों पाली ऐसी आशा।
जो कदापि न हो सकती पूर्ण, मन में भरती गहन निराशा ।।8।।
यह तो सबके साथ घटित होता, इसमे कुछ भी है नया नहीं।
अपने ही मन से हो उद्धेलित, सुख ढूँढता अन्यत्र कहीं ।।9।।
सुख दुख की भावनाएं बसती हैं, केवल मानव के मन में ।
मन से उत्पन्न तरंगे ही, सुख दुख भरती हैं जीवन में ।।10।।
हर्ष विषाद की नदिया की उत्पत्ति हुई, तुम्हारे ही मन में ।
मन से उत्पन्न तरंगे ही, भरती हैं सुख दुख जीवन में ।।11।।
उपलब्धियों पर करो विचार, उजले पक्ष का करो तुम ध्यान।
जीवन सार मिलेगा वहीं पर, पीड़ा का कदापि न होगा भान ।।12।।

अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव

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