मिटे नफरतों का कोहरा

मिटे नफरतों का कोहरा

लगाकर गले आपको कुछ देर तक रोना चाहता हूं
अश्कों से अपने आपके दिल को भिगोना चाहता हूं
तिनका तिनका सुख बिखरा है यहां वहां
इसे यादों के धागे में पिरोना चाहता हूं
कहते हैं प्यार में खुद का वजूद नहीं रहता
मैं भी अब खुद को खोना चाहता हूं
इश्क में वफा हर किसी को नहीं मिलती
नासमझ हूं फिर भी आपका होना चाहता हूं
आपने ज़हन में क्या-क्या तूफान छुपा रखा है
फिर भी दिल में एक छोटा सा कोना चाहता हूं
मैं कर सकूं छूमंतर दुनिया से नफरतों का कोहरा
ऐसा ही आफताब वाला जादू टोना चाहता हूं

रामगोपाल सांखला “गोपी”

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