हुनर- डी के निवातिया

हुनर

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छोटी छोटी बातों पर अपनों से गिला क्या,
इश्क मुहब्बत में हुई बातों का सिला क्या,
झुकने का हुनर जरूरी है यहां जीने के लिए,
अड़कर पर्वत के जैसे किसी को मिला क्या !!
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डी के निवातिया

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