हम किसान …

हम किसान थे
किसी क्रांति या आंदोलन से हमेशा
हमे खेतो मे पसीने बहाना बेहतर लगा
हाथ मे फावड़ा से धरा को चीर कर हमने सिर्फ बोना सीखा
बने हुए को बिगाड़ना या उजाड़ना तो
बस सरकारे जानती हैं
हमने तो बस देश के विकाश को चुना था
हम सीधे -साधे किसान
मिट्टी को माँ समझते हैं
और आकाश से गिरती बुंदों को ईश्वर का उपहार
सरकारे आती गयी और बदली भी गयी
हमने बस जब जो सही लगा किया
हमने लड़ाइयाँ लड़ी तो केवल मौसम से ,कभी बाढ़ से तो कभी सुखाड से
और लड़ते-लड़ते हमने कई बार खुद को उसी जमीन मे दफन कर दिया
जिसे खोद कर हम दूसरों के पेट को भरते आए
अब हमारी औलादे किसानी करना नहीं चाहती
मिट्टी मे लोट कर ,मिट्टी मे मिल जाने की खुशी क्या होती
शायद हमारी संताने भी नहीं जानती
गांधी और बाबा साहब के देश मे जन्मे हम किसान
खुद को हमेशा ही सुरक्षित समझते आए
पर,
आज अपनी कटती जड़े देख कर परेशान है
आज अपनी ही छीनती जमीन देख हैरान है
सत्ता मे बैठे हुक्मरान जिनहे हमने ही चुना
आज हम पर कभी आँसू गॅस तो कभी पानी बरसा रहे है
हम कभी भी क्रांति के सूत्रधार नहीं रहे पर वाहक जरूर रहे हैं
हमारे नाम पर वोट की राजनीति करने वाले पक्ष या विपक्ष इतना जान ले की
ये देश आन्दोलनो का रहा है
ये देश उस अर्धनगन फकीर का है जिसने सिर्फ एक लाठी और धोती के सहारे
अंग्रेज़ो को भगा दिया था
और ये देश उस भगत सिंह ,चन्द्रेसेखार आजाद और सुभाष का भी है
जिन्होनों अंग्रेज़ो के नाक मे दम कर रखा था
ये देश हम किसानो का है
हमारे बिना कही किसी की जय नहीं होती
और हम किसानो की कभी पराजय नहीं होती
हमे मामूली चिंगारी समझ कर जो बुझाने चले पानी की बौछारों से
कोई कह दे उन्हे
ये देश आन्दोलोनों का रहा है
और आन्दोलोनों का कोई जमाना नहीं होता
एक हवा चल पड़ी है ,लहर उठ पड़ी है
और क्रांति फिर से नसो मे बहने वाली है
गर संभल जाये तो बैठ कर निकले कोई समाधान
वरना नहीं थमेगा ये सिलसिला
अपनी मंजिल पर ही रुकेगा अब हमारा काफिला
जय जवान जय किसान ……. अभिषेक राजहंस

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