रात के राज़

 

 

कई राज दफन है

उस रात में

कई एहसास दबे हैं

तेरी बात में

उस सुगबुगाहट में

तेरी फुसफुसाहट में

कई राज दफन हैं

जो कहा था

उसके मायने अलग है

जो ना कहा

उसका दर्द बेइंतेहा है

उस रात का अंत तो था

मगर कोई सुबह नहीं

शायद……

उन बातों की

अब कोई जगह नहीं

सपना था कोई बुरा

खुली आंखों में

खुद को ये समझा लिया है

कोई बात नहीं

जो तूने अब

उन बातों को झुठला दिया है

तेरे मेरे जहन में

रात के हर पहर में

कई राज दफन हैं

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