खंडित संसार

 

 

खंडित होने का अर्थ है, किसी वस्तु विषय के प्राकृतिक रूप में कोई त्रुटि आ जाना, उसका पहले जैसा ना रहना। मूर्ति पूजन में यदि किसी भी कारण से मूर्ति खंडित हो जाती है तो उसका त्याग कर दिया जाता है। खंडित मूर्ति की पूजा नहीं की जाती। कोई भी व्यक्ति जानबूझकर मूर्ति को खंडित नहीं करता लेकिन किसी कारणवश हो जाए तो भी उसे ग्रहण नहीं करता। इसके उलट आज हम सभी अपने जीवन को, अपने संसार को दिन प्रतिदिन खंडित कर रहे हैं और जानबूझकर कर रहे हैं। आज के युग में मनुष्य अपने लोभ, मुनाफे व सहूलियत के लिए प्रकृति को दूषित व इस संसार को खंडित कर रहा है। ऐसा करने के लिए वो तरह तरह के तर्क भी देता है, बहस भी करता है किन्तु पर्यावरण और संसार को बचाने के लिए सहमत नहीं होता। हमारे द्वारा दिए जाने वाले कुछ विचित्र तर्क का विवरण किया गया है।

 

आज के युग में हम सभी केवल एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, कभी अमेरिका जैसे विकसित देश को जिम्मेदार ठहराते हैं तो कभी विकासशील देशों के सर ठीकरा फोड़ दिया जाता है। हम सभी मिलकर अपने पार्यवरण को नुकसान पहुंचाने के अलग अलग तरीके ढूंढ रहे है, कभी महंगी गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ, सीमेंट के जंगल खड़े करने के लिए पेड़ काटना, अपने आलस को बढ़ाने के लिए नई नई तकनीक ईजाद करना, रोकथाम के कानूनों कि अवहेलना करना आदि ही मुख्य कारण है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचना तो केवल एक कारण है इसके इतर अभी और भी वजह बाकी हैं।

 

ईश्वर द्वारा निर्मित इस खूबसूरत संसार , जिसमे ईश्वर ने सभी का ध्यान रखते हुए प्रकृति का संतुलन बनाया, हर जीव की अपनी एक अलग महत्ता बनाई। किन्तु हमने उस महत्व को नष्ट करते हुए, अलग वर्ग, धर्म, जाती में इस संसार को बांट दिया। आज विश्व के अलग अलग देशों में मनुष्य द्वारा निर्मित धर्मों के बीच एक जंग छिड़ी हुई है , जी प्रतिदिन इंसानियत व प्रकर्ती का विनाश कर रही है। वो संसार जिसे ईश्वर ने हम सबके लिए बनाया था आज हम उस पर अपना एकाधिकार चाहते हैं। अलग विचारधाराओं को कुचल देना ही आज मानव जाति के एक बड़े वर्ग की प्रवृति बन गई है।

 

ईश्वर द्वारा बनाए गए जैविक संतुलन को भी हम बिगाड़ चुके हैं, अपने मनोरंजन के लिए जानवरों से करतब करते हैं व मुख्य रूप से उनका इस्तेमाल भोजन के रूप में भी कर रहे हैं। हमारे द्वारा बिगाड़े गए इस जैविक संतुलन की आंच अब हमारे घरों तक भी आने लगी है। हर वर्ष बाढ़, सूखा व कोरोना महामारी जैसे प्रकोप हमें इशारा कर बताने की ईश्वर द्वारा कोशिश है, जिसे हमें जल्द समझ कर संभल जाना चाहिए।

इस सब के बाद हमारे सामने दो प्रश्न खड़े हो जाते हैं पहला जिस प्रकार हम खंडित मूर्ति का त्याग कर देते हैं या उसी प्रकार हमें इस खंडित संसार का त्याग कर देना चाहिए या जिस प्रकार जानबूझकर मूर्ति को खंडित करने वाले को सजा दी जाती है ठीक वैसे ही हमें सजा मिलनी चाहिए।

 

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