अगर मै प्रधानमंत्री होता

अगर मै प्रधानमंत्री होता! भारत का प्रधानमंत्री, ये कथन ही गौरव से परिपूर्ण और अत्यंत मनमोहक है। एक ऐसे सपने का सच हो जाना जिसका विश्लेषण कर पाना भी मुमकिन नहीं, प्रधानमंत्री होना स्वयं ही जिम्मेदारी रूपी कांटो से सजे पद पर विराजमान होना है, जहां मै, मेरा, नहीं हमारा , हम सबका सोचना व सभी के हित में कार्य करने की बाध्यता होती है। भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का मुखिया होना, उसकी अखंडता व संप्रभुता के लिए तत्पर रहना एक चुनौती के समान है। यदि इस चुनौती का सामना करने की जिम्मेदारी मुझे मिलती तो मै क्या करता?

 

इस विषय को सोचना और लिखना , दोनों ही बड़े मजेदार लग रहे है। बहुत से ऐसे सपने है जो आम आदमी के तौर पर कभी भी पूरे नहीं किए जा सकते, और कम से कम अपने खर्चे पर तो बिल्कुल भी नहीं। पूरे मान मनोबल के साथ विदेश यात्रा का सुख भला हमारे नसीब में कहां, अनेक राष्ट्र को संबोधित करना, उनकी आवभगत को स्वीकार करना कितना आनंदित होगा इसकी कल्पना ही खुशी से झूम उठने के लिए काफी है। मै वो सब तो बिल्कुल भी नहीं करूंगा जो बाकी सभी प्रधानमंत्री करते हुए आए हैं, ये खोखले दावे, वादे , झूठी तसल्ली नहीं नहीं ये सब कुछ नहीं, अगर आनंद ही लेना है तो खुल कर लिए जाएं इसके लिए झूठ बोलने की क्या जरूरत । सबकी इच्छाएं पूरी करू, मै कोई चिराग का जिन्न नहीं प्रधानमंत्री बना हूं, तो ऐसी बेतुकी बातों को पहले दिन से नजरअंदाज करते हुए मै अपने पद का पूरे कार्यकाल सुख भोगूंगा।

 

मेरे विचार पढ़ कर मुझ पर और मेरी सोच पर घिन तो जरूर आ रही होगी, जब ये सब कुछ ना करने का कहकर वो सभी यही करते हैं तो कम से कम मै तो सच बोल कर कर रहा हूं। आप मुझसे चाहेंगे कि मै महिला सशक्तिकरण , रोजगार, देश सीमा इत्यादि पर बात करूं। मगर क्या फायदा जिन्होंने इन मुद्दों को मजबूती से उठाया था उन्होंने ही कोनसी देश की तस्वीर बदल दी। मै अगर प्रधानमंत्री बनता हूं तो केवल आपको समझदार बनाऊंगा, आपके बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध रहूंगा, कोशिश करूंगा कि वो नौकर नहीं मालिक बने। वो मेरे या मेरे जैसे किसी के सामने हाथ फैला कर काम ना मांगे। मालिक नौकर से काम मांगता हुआ ये बात मेरी कल्पना से भी परे है, चोकिये मत इस देश के मालिक आप हैं और आपके लिए काम करने वाला मै ( प्रधानमंत्री ) आपका नौकर हूं। महिला सशक्तिकरण के लिए ना ही मै और ना ही पुलिस हर वक्त सुरक्षा दे सकते हैं और ना ही घर घर जाकर पुराने हालात को बदल सकते है, मै हर बच्चे को चाहे वो लड़की हो या लड़का बचपन से मजबूत , कम से कम खुद की रक्षा करने के काबिल बनाने के लिए काम करूंगा। मै प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया हूं सरकार नहीं, हर कार्य को करने के लिए विभाग और मंत्रालय हैं, मै आपकी ओर से चौकीदारी करूंगा की कहीं कोई विभाग या मंत्रालय आपकी पहुंच से दूर तो नहीं जा रहा। मेरा कार्य आपके मन की बात को जन तक पहुंचाने और आपकी परेशानी का निवारण करने का होगा। आपको इस बात का एहसास कराने की पूरी कोशिश करूंगा कि मै केवल सहानुभूति देने, पुलिस केवल जांच करने व कानून केवल दोषी को सजा देने में सक्षम है परन्तु कुछ ग़लत होने से केवल आप और आपका विश्वास रोक सकते है। मै आपसे हूं आप मुझसे नहीं। आप लोगों को अपने देश और अपनों के लिए खड़ा होना सिखाने के बाद यदि समय मिलेगा तो मै जरूर एक चतुर नौकर की तरह आपके टैक्स से मिलने वाली तनख्वाह पर विदेश की सैर करने जाऊंगा, आखिर मेरे भी तो कुछ सपने हैं।

 

 

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