पिछली सीट 2

आज भी जब मै घर से निकलता हूं और उनके शहर से गुजरता हूं, ऐसा लगता है मानो किसी साए की तरह वो मेरे साथ साथ चल पड़ी हैं। 25 नवंबर बुधवार का दिन, आज ठीक 1 महीना 28 दिन हो चुके हैं उनसे मुलाकात हुए। वो मुलाकात सचमुच हमारी आखिरी मुलाकात ही थी, इस कहानी का अंत इस तरह होगा इसकी कल्पना कम से कम मैंने नहीं की थी।

 

ऐसा नहीं है कि उस दिन के बाद या उनसे अलग स्कूटी की पिछली सीट पर कोई बैठा ना हो, ऐसा भी नहीं है कि मै टूट कर अकेला तन्हा रहा हूं। उस दिन के बाद से मैंने खुद को समय दिया और नए रिश्ते तलाशने की कोशिश में लग गया, चूंकि ज़िन्दगी ना किसी एक के लिए चल रही थी और ना ही रुक सकती थी। ऐसा भी नहीं था कि मै वो सब कुछ हर वक्त याद करता था मगर ऐसा भी नहीं था कि मै वो सब कुछ भूल चुका था। आज भी कभी जब अकेला होता हूं तो वो दिन मेरी आंखों के सामने से गुजरने लगता है, एक एक बात उस दिन की ऐसे याद आने लगती है जैसे कल की ही बात हो। 28 सितम्बर का दिन , दोपहर का समय मै उनके आंखों से ओझल होने तक वहां इंतजार करने के बाद भी वहीं रुका था कुछ देर, मै अब तक नहीं समझ पा रहा था कि आज जो हुआ है वो क्या था या अब इस सब पर मै क्या कहूं और क्या करूं, मै शून्य में था। मेरे मन में सवालों का तूफान उठ रहा था जिनके जवाब देने वाला अब वहां कोई भी नहीं था। शुरू से शुरू हुई कहानी मेरे दिमाग में चल रही थी, 6 महीने पहले फरवरी के महीने में सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था हम एक दूसरे को काफी वक्त दे रहे थे, वो आकर्षण था या प्यार पता नहीं…..।

 

एक वक्त ऐसा था जब पल पल की खबर साझा की जा रही थी, अगर जो कुछ देर बात ना हो तो वो बेचैन हो जाती थीं। घर से निकलते ही फोन पर हमारी बाते शुरू हो जाती थीं, हम कॉलेज साथ आते जाते थे, वो अपने घर पहुंच कर भी मेरे घर ना पहुंचने तक फोन पर बात करती रहती थीं, हां हम कॉलेज में जरूर थोड़ी दूर रहा करते थे। देर रात तक चैटिंग और घंटों फोन पर बात आम बात हो चुकी थी। ना जाने कितने यादगार लम्हे हमने साथ बिताए थे, कितनी ही जगह हम साथ गए थे। ऐसा नहीं था कि ये सब सिर्फ मेरी तरफ से था, उन दिनों वो ये सब किया करती थीं। फिर एकाएक लगे लॉकडाउन और इसकी 6 महीने तक खिंचने की वजह से रिश्ते लगभग खत्म हो चुके थे। रूठने मनाने की लंबी जद्दोजहद के बाद अगस्त में हमने फिर से अपनी दोस्ती की एक नई शुरुआत की थी, अब सब कुछ पहले जैसा नहीं था फिर भी बेहतर था। इस बार की सुलह हमारे कुछ खास दोस्तों ने कराई थी जाहिर है कि अब हमारे बीच पहले जैसा कुछ भी नहीं बचा था। मगर फिर भी हम लोगों को इसका आभास नहीं होने देते थे , अब तक जो कुछ भी हुआ उसके बाद तो कम से कम कुछ भी ठीक होने की उम्मीद नहीं थी या यूं समझ लीजिए कि हम दोनों ही अब आगे बढ़ चुके थे। सितंबर के पहले हफ्ते में परीक्षा की वजह से हमें कॉलेज आना था, हम 4 दोस्त एक साथ मिलकर ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे जिसमे वो भी शामिल थीं। आखिरकार हम सभी परीक्षा के लिए कॉलेज पहुंचे, ठीक 6 महीने बाद हम मिले थे, मुझे एक सामान्य मुलाकात की उम्मीद थी मगर वहां उससे ज्यादा ही हासिल हुआ। वो परीक्षा शुरू होने के पहले और बाद में पूरे समय मेरे साथ ही रहीं, उनके बर्ताव से ऐसा लग ही नहीं रहा कि पिछले 6 महीनों से हमरी बातचीत बंद है, इससे मै ही नहीं मेरे दोस्त भी हैरान थे। परीक्षा के बाद उनके पापा उन्हें लेने आए, जिन्हे उन्होंने ये कहकर वापस भेज दिया कि वो मेरे साथ घर चली जाएंगी। अब ये सिलसिला यूं ही चलने लगा सुबह उनके पापा उन्हें छोड़ जाते थे और दोपहर में वो मेरे साथ घर जाती थीं, वो हर रोज मुझे जल्दी बुला लिया करती थीं हम दोनों लगभग सबसे पहले अंदर चले जाया करते थे जहां पढ़ाई और इधर उधर कि बाते करते रहते , हसी मजाक और एक दूसरे को मारना फिर से शुरू हो गया था, एक पल को तो मुझे लगा कि शायद अब सब सही हो गया है। मुझे डर था कहीं ये सब एक सपना ना निकले।

 

28 सितम्बर को उन्होंने वो सपना तोड़ दिया और वास्तविकता से मुलाकात कराई, जो उन्होंने उस दिन कहा उसकी भनक उन्होंने इतने दिनों में किसी को भी नहीं लगने दी। वाकई कमाल की अदाकारा हैं वो, अपनी अदाकारी से मुझे ही नहीं बल्कि बाकी दोस्तों को भी अंधेरे में रखे हुए थीं। मै खुश था, स्कूटी काफी धीरे चल रही थी , वो करीब आईं और मेरी तरफ झुकते हुए अपना चेहरा मेरे बराबर में ले आयी। मै उनकी बढ़ी हुई धड़कनों को महसूस कर सकता था, उनकी गरम सांसे मेरे चेहरे पर आ रही थी। उन्होंने भारी आवाज में कहा “मेरी शादी तय हो चुकी है, लॉकडॉउन के पहले ही, इसीलिए मैंने लड़ाई की थी ये सोचकर कि तू मुझे भूल जाएगा। मगर ऐसा नहीं हुआ, मै तुझे दुखी नहीं करना चाहती थी इसलिए नहीं बताया अब तक”। मै खामोशी से उन्हें सुन रहा था और वो बिना रुके बोल रही थी, उन्होंने लड़के के बारे में भी सबकुछ बताया। मैंने सिर्फ और सिर्फ उन्हें बधाई दी, ना अब मेरे पास कोई सवाल था और ना ही मै कोई जवाब सुनना चाहता था। मै खामोशी से स्कूटी चला रहा था और तेज चला रहा था, मै चाहता था कि बस उन्हें जल्दी से जल्दी उतारकर दूर चला जाऊ, पता नहीं क्यों मगर मै उनके साथ एक पल भी और नहीं रुकना चाहता था। मैंने उस दिन के बाद उनसे हर तरह का रिश्ता खत्म कर दिया । उनकी दी हुई हर कसम और किए हुए हर वादे को आज उनकी शादी के दिन के बाद से खत्म कर दूंगा।

यकीनन पिछली सीट कल भी खाली नहीं थी और आगे भी खाली नहीं रहेगी…

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