ज़िन्दगी के काले पन्ने

काली अंधेरी रात, आसमान में कड़कड़ाती हुई बिजली के साथ मूसलाधार बारिश और पेड़ को जड़ से उखाड़ देने वाली आंधी चल रही थी। वरुण घर के बरामदे में अकेला बैठा था, उस रात बरसात में बीते पुराने दिनों को याद कर वरुण की आंखें भी नम थीं । उसकी ज़िन्दगी की किताब में जुड़े वो काले पन्ने बड़े दुखदाई थे। पिछले दंगों में दंगाइयों ने उसकी दुकान में आग लगा दी थी वो किसी तरह से बचते बचाते अपनी जान बचाकर वहां से निकल गया था। उस दंगे ने उससे उसकी ज़िन्दगी भर की कमाई छीन ली थी।

 

त्योहारों का सीजन नजदीक था, वरुण ने मार्केट से पैसा उठाकर अपने कारोबार में लगाया था, इस बार उसे अच्छा काम निकलने की उम्मीद थी। वरुण का कपड़ों को अच्छा व्यापार था, वो पिछले साल के घाटे से उबरने की पूरी कोशिश कर रहा था। वरुण पूरी तरह से कर्ज में डूबा हुआ था, ये त्योहारों का सीजन उसके लिए आखिरी उम्मीद था। दंगों में सब कुछ खत्म हो जाने से वरुण टूट चुका था, अब उसे उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आ रही थी। वरुण उस सदमे और दुख में हफ्तों तक घर से ही नहीं निकला। घरवालों की लाख मिन्नतों पर वरुण एक दिन मार्केट की तरफ गया, ये सोचकर कि अपनी दुकान की हालत ही देख आएगा। मार्केट में सभी उसे हिकारत भरी नजरों से देख रहे थे, वो सभी के ऐसे वर्ताव को देखकर परेशान था, वरुण समझ नहीं पा रहा था जहां लोगों को उससे संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी वहां वो सब उसे नफरत भरी निगाहों से क्यों देख रहे थे। इससे पहले कि वो कुछ समझ पाता सामने की दीवार पर उसे अपना पोस्टर लगा हुआ दिखा जिसमे उसे दंगाई घोषित किया हुआ था और जुर्माने की राशि भी लिखी हुई थी। राज्य सरकार के आदेश पर प्रशासन ने यह कार्यवाही की थी। वो बेकसूर होते हुए भी अपराधी बन चुका था। इस सब की वजह से कोई भी उससे संबंध नहीं रखना चाह रहा था, सभी ने मदद के हाथ उसकी ओर से खींच लिए थे। कारोबार ठप होने और कोई मदद न मिलने से वरुण का परिवार भूंखा सोने के लिए मजबूर था। वरुण के परिवार ने वो सब कुछ सहा था जिसकी कल्पना उन्होंने कभी नहीं की थी। कर्ज में डूबा परिवार और अदालती खर्चों में वो लगभग रास्ते पर आ चुका था। मगर उसका परिवार उसके साथ खड़ा था, वरुण के पास यही एक सबसे बड़ी ताकत बची थी। इन सब परेशानियों के बीच एक बार तो उसका मन आत्महत्या का भी हुआ मगर अपने परिवार के प्यार और विश्वास ने उसे ऐसा ग़लत कदम उठने से रोक लिया था।

 

वरुण को महीनों लग गए इस परेशानी से निकल पाने में, वरुण ने अदालत में अपनी बेगुनाही साबित की और मार्केट में खोई इज्जत को वापस हासिल किया। मगर अब भी उसके सामने कारोबार को फिर से शुरू करना और पुराने कर्ज से मुक्ति पाना बहुत बड़ी चुनौती थी । उसने और उसके परिवार ने कड़ी मेहनत से फिर से खुद को खड़ा किया ,पहले जैसा तो नहीं मगर इज्जत से दो वक्त के खाने लायक उसने अपना कारोबार शुरू कर लिया था और धीरे धीरे कर्ज से भी मुक्ति पा चुका था। आज भी जब वो ये सब याद करता है तो उसकी आंखे नम हो जाती हैं, मगर वो उन दिनों को कोसता नहीं है वो उन्हें एक इम्तिहान के रूप में देखता है और और उसमें पास होने पर खुश भी होता है।

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