भुखमरी: एक लाचारी

मैं थोड़ी सी हिम्मत करके सच की बात सुनाता हूँ
जिनको हम सब भूल रहे हैं उनकी याद दिलाता हूँ
धनवानों से धन्य देश है पकवानों से भरा देश है,
फिर भी बच्चे भूखे सोते बोलो कितना प्यारा देश है,
सरकारों की तरफ़ देख कर अपना हाथ छुपाते हैं,
बच्चे कुछ माँगे उससे पहले ही नजरें चुराते हैं,
भूख बड़ी तड़पाती है ये ख़ुद महससू किया होगा,
सर्दी की इन रातों में सोचो बच्चों ने क्या खाया होगा,
हम छोटी सी बातों पे माँ बाप से भिड़ते रहते हैं,
झोपड़ियों में कुछ बच्चे माँ बाप को ढूंढा करते हैं

बच्चों के उन आँसू का ही दर्द मैं लिखता फिरता हूँ
राजनीति के दरबारों में दर्पण दिखलाता फिरता हूँ
मजहब के ठेकेदारों तुम भी थोड़ा तो अब बोल ही दो,
बच्चों के रोटी की क़ीमत को थोड़ा तो अब तौल ही दो
बुद्धिजीवियों आप भुखमरी को आपदा ही बोल दो
चुनाव अभी आ गया कुछ रोटियाँ ही सेंक दो

भूख माँ के आँचल से लिपटा इक अरमान है
भूख पिता के टूटे हुए हौसलों का आसमान है
भूख बहन की बेबसी और लाचारी का सामान है
भूख हर गरीब की इस देश में पहचान है
भूख छोटे बच्चों की उम्मीदों पे रोक है
भूख उनके सपनों को तोड़ने का दौर है
भूख तन के कपड़े छीन लेने का ही नाम है
भूख जिंदा रह कर भी रोज़ मरने का सामान है

भूख बच्चों के आँसुओं का सैलाब है
भूख सरकारों के लिए हमेशा एक बवाल है
भूख हमारे मक्कारी की एक सच्ची पहचान है
भूख हमें इंसान बनाती हुई एक मसाल है
भूख इस देश की सबसे बड़ी लाचारी है
भूख भारत को विश्वगुरु से रोकती इक बीमारी है

ये धरा तो शौर्य का इतिहास लिखती है
ये धरा तो दान में विश्वास रखती है
इस धरा ने ख़ुद से ज़्यादा औरों का है मान रखा
सर कटाया और सबसे ऊपर हिन्दुस्तान रखा
इस धरा पर भूख से बच्चा मरे ऐसा न हो
इस धरा पे भूख से बेटी बिके ऐसा न हो
इस धरा पे भूख से माँ रोये ऐसा न हो
भूख से पिता फाँसी को झूले फिर कभी ऐसा न हो

आज तुम भी लो शपथ कि कोशिश हम पूरी करेंगें
इस धरा से भुखमरी के नाम को ही ख़त्म करेंगें
और सरकारों से भी हम भूख पर लड़ते रहेंगें
जितने दिन हम जी सके हम भुखमरी को कम करेंगें ।।

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  1. Madhu 23/03/2021

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