।। माँ लक्ष्मी स्तुति।।

जय विष्णुप्रिया लक्ष्मी माता, जय सबकी सुख सम्पति दाता।
सकल जगत से तुम हो पूजित, सब सदगुण तुमसे आता।। १ ।।
सागर से उदभव हुआ तुम्हारा, जग में कहलाई तुम विष्णुप्रिया ।
आशीष वृष्टि से जग को सिंचित कर, सबका तुमने कल्याण किया ।। २ ।।
पद्म पत्र है तुम्हारा आसन, विश्व तुम्हारी पूजा करता।
तुम्हारी आशीष कृपा से माता, जीवन में खुशियाँ भरता ।। ३ ।।
गणपति संग विराजित होते, जग कहता जय लक्ष्मी – गणेश।
करो कृपा अपने भक्तों पर, काटो सबके सकल क्लेश ।। ४ ।।
जिस पर होती कृपा तुम्हारी, उसे न होता कोई अभाव।
सारे जग की माता बनकर, सबमें भरती हो सदभाव ।। ५ ।।
दीपावली होती तुमसे प्रकाशित, जग में तुम्हारी पूजा होती ।
दीपों की जगमग जगमग से, रात अंधेरी प्रकाशित होती ।। ६ ।।
धन धान्य तुम्हीं से जग पाता, सदगुण भी है तुमसे आता ।
जिस पर हो माँ कृपा तुम्हारी, सब भाँति वह सुख पाता ।। ७ ।।
विष्णुप्रिया बनकर हे माता, जग का तुमने कल्याण किया ।
दान देकर सदगुण का याचक को, उसका बेड़ा पार किया ।।
८ ।।
धनतेरस से शुरू होती पूजा, दीपावली होती तुमसे जगमग ।
अंधेरी रात अमावस की, दीपों से होती जगमग ।। ९ ।।
जिस याची से याचक तुम्हे ध्याता, मनवांछित फल वैसा पाता ।
निराश न होता द्वार से याचक, खुशियों से घर भर जाता ।। १० ।।
सुर, नर, मुनि गणों से पूजित माता, बारम्बार तुम्हें प्रणाम ।
करो कृपा हे माता सब पर, जग सुमिरै तुम्हें आठों याम ।। ११ ।।

अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव

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