विष्णुछंद – गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

धीरे-धीरे
विष्णुपद छंद – 16+10 अंत 2

दौड़ेगा तो थक जायेगा, धीरे – धीरे चल
चलना ही तो जीवन है यह, दीपों सा तू जल।

ठोकर भी गर लगे तुझे तो, तुम मत घबराना
उठकर तुरत खड़े हो जाना, है मंज़िल पाना।
चाहे जितना संकट आए, जायेगा सब टल
चलना ही तो जीवन है यह, दीपों सा तू जल।।

हम भी तो हैं साथ तुम्हारे, डटे रहो पथ पर
हुजूम सा यह निकल पड़ा है, एक खड़ा रथ पर।
विजय होगी सत्य की भैया, आयेगा वो पल
चलना ही तो जीवन है यह, दीपों सा तू जल।।

झूठों का मुँह काला होता, है अंजाम यही
दानव से मानव बन जाओ, है पैगाम यही।
भटक गये इधर उधर तुम, ढ़ूढ़ो अपना हल
चलना ही तो जीवन है यह, दीपों सा तू जल।।

बदनामी से डरकर रहना, बन प्रेम पुजारी
मदद हमेशा मिलकर करना, रहे न दुखयारी।
सादा जीवन फिर से लाओ, रहे न मन में छल
चलना ही तो जीवन है यह, दीपों सा तू जल।।

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  1. Vivek Singh 24/11/2020

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