डायरी

1
जितनी भी गुजरी बेमिसाल गुजरी
तेरी पनाह में हर चीज बड़ी है
मुस्कराते हुऐ पलटे मुक्कदर के पन्ने
हमने ज़िन्दगी तेरी आँखों से पढी है

2
जिसपे दूजा रंग ना चढे
वो रंगत मेरी बना दो तुम
बनाकर मुझे बंसी अपनी
होंठों पर लगा लो तुम

3
चल कुछ अच्छा कर जाऐं हम
इससे पहले की बिखर जाऐं हम
4

बात ये नहीं की खूबसूरत है तू
बात ये भी नहीं की जरूरत है तू
बात बस इतनी सी है भोले सनम
मेरे हर ख्वाब की मूरत है तू

5
ये सच है की तुझसे
रूठा नहीं हूँ मैं
तू जानती है की
झूठा नहीं हूँ मैं

खा लें कसम
कैसे तेरे सर की
तू वो सांस है जिसके बिना
जीता नहीं हूँ मैं

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