यह कैसा लोकतंत्र है!

निर्दोष कई बर्षों से कारागार में है।
चेतावनी लेकर अपराधी बाहर है।
नेता जो कहते है वही सत्य है।
लोगो का दुःख बेरोजगारी, गरीबी असत्य है।
क्या यह गरीबतंत्र है?
ये कैसा लोकतंत्र है !

चार बर्षों तक पसरते सन्नाटे है।
अंतिम बर्ष में होता प्रचार है।
न्यायालय में कई कानून असंवैधानिक है।
सरकार के चलन में वही वैधानिक है।
क्या यह भीड़तंत्र है?
यह कैसा लोकतंत्र है।

अभिव्यक्ति की आजादी से ज्यादा जहाँ ,
आतंरिक सुरक्षा का सवाल है।
जहाँ पर्यटन के नाम पर मंदिरों का नव निर्माण है।
क्या यह धर्मतंत्र है ?
यह कैसा लोकतंत्र है !

चुनाव जहाँ हर नागरिक का अधिकार है।
फिर भी सिर्फ रहीशों की सरकार है।
सारी जनता का मुखिया में अविश्वास है।
फिर भी विश्वास का प्रस्ताव पास है।
क्या यह अँधा तंत्र है ?
यह कैसा लोकतंत्र है।

धार्मिक समूह की जहाँ भावनाये जहाँ जान भावनाये है।
जाति धर्म समुदाय की जहाँ राजनीति निर्मित सीमाएं हैं।
क्या भीड़ हत्या का एक मात्र कारण अफवायें हैं।
क्या ये डॉ आंबेडकर की वही आशंकायें है।
क्या यह घ्रणातन्त्र है ?
यह कैसा लोकतंत्र है !

छुपकर आकड़ों को जहाँ होती ऑंकड़ेवाजी है।
जहाँ हिन्दू है डॉक्टर ,और मुस्लिम तो काज़ी है।
क्या लोकतंत्र का अर्थ सिर्फ हाँ जी ही हाँ जी है ?
क्या यह व्यर्थ तंत्र है ?
यह कैसा लोकतंत्र है।

जहाँ आरक्षण तो है पर रोजगार नहीं है।
सामाजिक न्याय तो है पर आर्थिक समानता नहीं है।
जनता में आक्रोश तो है पर नेता स्वीकारता नहीं है।
संविधान को पूजता तो है पर मानता नहीं है।
क्या यह शो तंत्र है ?
यह कैसा लोकतंत्र है!

नैतिकता जनहित अल्पसंख्यक की जहाँ कोई परिभाषा नहीं है।
और लाभ के पद का कोई पता नहीं है।
आरक्षण का कोई पुनर्निरीक्षण नहीं है।
युवा चुनाव को इच्छुक नहीं है।
क्या यह भय तंत्र है ?
यह कैसा लोक तंत्र है !

रचनाकार :- प्रेम कुमार गौतम

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