Chal pada hu (चल पड़ा हूँ)

चल पड़ा हूँ

 

ना छूनी है अब छाया , ना करना है अब दुःख दूना 

 

चल पड़ा हूँ अब भरने आज तक था जो सूना  !

 

द्वारा – मोहित सिंह चाहर ‘हित’

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