गुरू

कैसे करूं गुणगान तेरा
हे गुरू तू है भगवान मेरा
तुमने रोपा वो भ्रूण उर में
भाग्य फलित उनवान मेरा

मैं ऋणी रहूँगा सदा तेरा
बीता बचपन उत्तम मेरा
तेरा सानिध्य पाकर के
हुआ ये जीवन धन्य मेरा

जिसने चित्त का निर्माण किया
विधा से जीवन आसान किया
मैं कोटि कोटि नमन रहूँ
हे देवों से बड़े इंसान तेरा

हे प्रभु बस मुझको ये वर दे
हर जनम उनको मेरा कर दे
मैं लुटाऊँ उनपर नित्त प्रसून
ऐसा गुरू प्रभु हर घर को दे

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