दिल तो बच्चा है……………..देवेश दीक्षित

दिल तो बच्चा है

तभी तो सच्चा है

कदम उठाने से कुछ भी पहले

ये सबको आगाह करता है

क्या अच्छा है क्या बुरा है

ये अवगत उससे कराता है

फिर भी जो न उसकी माने

वो जीवन में चोट खाता है

चोट खा कर फिर न जाने

क्या क्या अपराध करता है

और अपराध कर-कर के

गुनहगार बड़ा बन जाता है

दस्तक दी थी उसको दिल ने

मत बड़ आगे खतरा है

फिर भी न मानी उसकी उसने

तभी फांसी पर लटका है

अब क्या फायदा कहने से

मान लेता गर दिल की बातें

दिल तो बेशक बच्चा है

फिर भी ये तो सच्चा है

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