प्रेरणा………….देवेश दीक्षित

आप सब को पढ़ कर

मेरी प्रेरणा जागती है

की कुछ लिखूं मैं भी कागज पर

ये तमन्ना जागती है

फिर खो जाता हूं

अक्षरों के महासागर में

और डूब जाता हूं

शब्दों के विचार धारा में

कौन से शब्द चुनू और कौन से छोड़ूं

इसी असमंजस में फंस जाता हूं

फिर चुनता हूं शब्दों की माला को

उसी को बुनने में लग जाता हूं

जोड़ता हूं शब्दों से शब्दों को

और नई रचना को जन्म देता हूं

पहुंचाता हूं आप सब के बीच इसको

यही विचार करता हूं

पसंद आए आप सब को

यही आशा करता हूं

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