कविता मेरी ऐसी हो…………….देवेश दीक्षित

कविता मेरी ऐसी हो

जिसे सुन सब गद – गद हो जाएँ

चेहरे पर न कदापि रोष हो

सुन कर सब वाह – वाह कर जाएँ

कैसी भी कठिन परिस्थिति हो

सुन कर सब मद – मस्त हो जाएँ

बच्चे भी सुन लें जिसको

चेहरे पर उनके भी मुस्कान खिल जाए

जग में कोई दुखी न हो

ऐसी इसकी गाथा बन जाए

कविता मेरी ऐसी हो

जिससे पराए भी अपने हो जाएँ

कोई न किसी का दुश्मन हो

सब भाईचारे में खो जाएँ

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