अगर कीचड़ में खिला हूँ तो क्या है

दो बातें तो करलो, मन को परखलो,
मन शुद्ध, तन मैला तो क्या है,
कमल हूँ कमल सा दिल है मेरा,
अगर कीचड़ में खिला हूँ तो क्या है ।
आसमां को मैं भी कभी छू लूँगा,
अगर ज़मीं पर पला हूँ तो क्या है,
चंदा हूँ चमकती रात है मेरी,
अगर तुम से दिन में मिला हूँ तो क्या है ।

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