नकाब

नहाकर, कपडे बदलकर,
गीला तौलिया बालकनी में
इक रस्सी पर टांगा ।

आँखों में नमी लिए,
माथे पर शिकन लिए,
जल्दी -जल्दी बाल बनाये।

इक परफ्यूम की शीशी से,
कुछ छींटें कपड़ों पर छिड़के,

मेज़ पर पड़े कुछ कागज़ात,
बैग में तरुज्जत से रखे।
धूप का चश्मा आँखों पर पहना।

चार्जर से निकालकर,
मोबाइल फ़ोन हाथ में लिया।

दराज़ से बटुआ और चाबी निकाली,
इक घर की, इक गाडी की।

दरवाज़े पर रखे स्टैंड से,
इक जोड़ी जूता पैरों में डाला ।

देहलीज़ से कदम बाहर पड़ते ही,
चेहरे पर इक नकाब पहना।
बस इक फर्क था।
ये नकाब बाहर से नज़र नहीं आता।

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