कृष्ण:-विजय

कृष्ण तेरी लीला है कैसी
कैसी तेरी माया है
श्यामल वर्ण में तूने
सबको ही रिझाया है

घर-घर जाकर तो तूने
चोरी माखन का किया है
और तूने गोपियों का
दिल भी चुराया है

छोड़ दिया गोकुल की गलियां
छोड़ दिया यशोदा है
निष्ठुरता भी तुझमे कितना
छोड़ दिया राधा है

धर्म के खातिर तो तूने
कुरुक्षेत्र भी सजाया है
सारे जगत को है तूने
पाठ गीता का पढ़ाया है

देते हो मोक्ष उसे
भाव जिसका भाया है
अन्यथा जीवनचक्र में उसे
तूमने उलझाया है

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