रिश्ते – डी के निवातिया

रिश्ते
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रिश्ते वही मगर,
रिश्तो में रिश्तो की वो बात नहीं है,
सम्बन्ध वही,
मगर सम्बन्धो में ज़ज्बात नहीं है,
घर में बैठे,
चार प्राणी अपनी गर्दन झुकाये,
साथ जरूर है,
मगर आपस में कोई संवाद नहीं है !!

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डी के निवातिया

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