तू कैसा प्रेमी है – डी के निवातिया

तू कैसा प्रेमी है !!

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देता है न माँगता
सोता न जागता
न रोता न हँसता
भागता न थकता
देखता न तकता,
बोलता न बकता,
सभी को लगता
तू कोई फरेबी है,
रे ! तू कैसा प्रेमी है !!

खाता न खिलाता,
पीता न पिलाता
मिलता न मिलाता
डुलता न डुलाता
पूजता न पुजवाता
सूझता न सुझाता
तस्वीर जैसे जड़ी
कोई तो फ़्रेमी है,
रे ! तू कैसा प्रेमी है !!

सतयुग न त्रेता है
तू चोर न नेता है
वाचक न श्रोता है
कुछ लेता न देता है
राक्षस न देवता है
छुपता न देखता है
तेरी कौन योनि है,
रे ! तू कैसा प्रेमी है !!

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डी के निवातिया

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