सभ्य नागरिक:-विजय

अब न हम गन्दा गंगा करेंगे
अब न हम दूषित हवा करेंगे
अब न हम सबसे झगड़ा करेंगे
अब न सड़क पर कचड़ा करेंगे

अब न यहाँ-वहाँ पर हम थूकेंगे
अब न शोरगुल के गीत बजेंगे
अब न खुले में सब शौच करेंगे
अब न पीकर नग्न रास्ते पड़ेंगे

अब न लड़कियों के पीछे घूमेंगे
अब न शिक्षक को तंग करेंगे
अब न बस-ट्रेनों को हम फूकेंगे
अब न धरना-प्रदर्शन हम करेंगे

अब न मजहब में हम लड़ेंगे
अब न बड़ो की बात काटेंगे
अब न संयम हम खोएंगे
अब न नियम लॉकडाउन तोड़ेंगे

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