नाकामी – शिशिर मधुकर

फूल वो सुख नहीं देता जिसकी खुशबू में खामी है
तुम आगे बढ़ नहीं सकते अगर मन में गुलामी है

भले कांटें अनेकों हैं महकते गुल की सोहबत में
दर्द को भूल कर सारे डाल वो मैंने थामी है

बहुत समझा लिया उनको मगर ना कुछ बदल पाए
बाग़ वीरान है तो माली सुन तेरी नाकामी है

मुसीबत आ गई और वो कभी भी साथ ना आया
फकत कहने की खातिर इंसान वो नामी गिरामी है

मल्कियत हो गई अपनी मगर खुल के कहें किससे
हवेली पास में मेरे वो सुन मधुकर बेनामी है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 20/07/2020
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/07/2020
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/07/2020
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/07/2020

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