रसोई

ज़्यादा पुरानी बात नहीं,
एक साल पहले हर घर का ये नज़ारा था |
जब  Lauxury और class के गालों पर
मिला तमाचा करारा था |

दोपहर के करीब साढ़े तीन बजे,
रसोई से कुछ आवाज़ें कानों में पड़ी ।
गौर से सुनने पर मालूम हुआ,
बर्तन आपस में बतिया रहे थे ।

कर्छुली कढ़ाई से कह रही थी,
आजकल मेमसाहब रसोई में ही नज़र आती है,
घंटों गैस के चूल्हे के साथ बिताती है ।
एक भगोना गंजिया के कानों में फुसफुसाया,
‘ज़्यादा कुछ नहीं जानती है
सब YouTube पे देखकर पकाती है ।

छन्नी तभी तपाक से बोली,
‘कई बार साहब आधी रात रसोई मैं आते हैं,
कुछ कच्चा-पक्का बनाकर खाते हैं’ ।
‘इनके पकवानों में पुराने रसोईये सा दम नहीं
मेमसाहब को कहते सुना है,
“खाना बनाना Meditation से कम नहीं ।
गिलास बोली ‘कुछ नन्हे-मुन्ने हाथ भी
अब हर रोज़ रसोई में नज़र आते हैं,
कभी Maggi तो कभी pasta banaate hain ‘।

Gossip का ये सिलसिला
रसोई में घंटों जारी रहा,
कभी कोई तो कभी कोई दूजे पे भारी रहा ।
तभी एक तेज सीटी से,
कुकर ने टकराते बर्तनों को शांत किया
खींचा-तानी के माहौल को जैसे-तैसे अंत किया ।

8 Comments

  1. vijaykr811 14/07/2020
    • Garima Mishra 14/07/2020
  2. Shilpa Kulkarni 14/07/2020
    • Garima Mishra 14/07/2020
  3. subash 17/07/2020
    • Garima Mishra 18/07/2020
  4. डी. के. निवातिया 20/07/2020
    • Garima Mishra 29/07/2020

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