1

बेशक कितना भी सफल हो जाऊँगा
लेकिन मैं भी एक दिन कल हो जाऊँगा
फिर समा जाऐगा सबकुछ शुन्य में
चाहे कितना भी अव्वल हो जाऊँगा

2

कसम से बेगुनाह थे हम
कसुरवार उसका चेहरा था
बोलते तो सब बिखर जाता
उनसे प्यार इतना गहरा था

3
खुली हवा में भी सांसो की लाचारी क्यूँ है
जिंदगी तू आखिर इतनी भारी क्यूँ है

4
उसकी झुकी नजर को
देखा तो ये लगा
इससे ज्यादा खुबसुरत
कुछ होता है क्या

5

सहेजकर रखा तुझे तेरी यादों में
सांसे भी तुझे दुआ में माँगती रही

ढूँढेगे हम खुद को तेरी पनाहों में
जबतक मेरे हमदम ये ज़िन्दगी रही

6
मेरे मुकद्दर में उपरवाले ने
दुश्मन ऐसे दिये
सामने रहे पर कभी
दिखाई नहीं दिये

7
है मुमकिन नहीं की तुझे भूल जाऊँ मैं
तुझ सा बता और कहाँ से लाऊँ मैं

8
चढाऊँ मैं निज पुष्प प्रसून
सनातन सदैव महान रहे
हर बालक आकंठ अमृत
पीढ़ी नीती निधान रहे

2 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 13/07/2020
  2. rakesh kumar Rakesh Kumar 28/07/2020

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