चमक कम न हो – डी के निवातिया

चमक कम न हो

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चाँद से रोशन चेहरे की चमक कम न हो,
झील सी गहरी ये आँखे कभी नम न हो,
बहारों की फिज़ाओ में दमकता ये हुस्न,
इस हंसीं चेहरे पर कोई कभी गम न हो
खुशियां इतनी मिले तुम्हे इस जीवन में,
रोशन हर शम्मा रहे भले हम हो न हो !!

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स्वरचित: डी के निवातिया

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