करोना के साइड इफ्कट

कामिनी अपने घर से दो चार कदम पर एक अर्पाटमेंट में सिन्हा जी के यहॅा घरेलु काम करती है। करोना वायरस की वजह से हुए लॉक डाउन में भी कामिनी सुबह सुबह काम पे वह सिन्हा जी के यहॅा पहुॅच गई। कामिनी का घरवाला रिक्शा चलाने का काम करता था।वह भी सुबह सुबह रिक्शा ले कर बाजार की तरफ निकल गया ।काफी समय निकलने पर भी कोई सवारी नहीं मिलने पर पुलिस के डर से उसका पति घर समय से पहले पहुच गया।इधर कामिनी प्रतिदिन के भांति सिन्हा जी के यहॉ काम कर रही थी।बार बार वह सिन्हा जी के द्वारा देखी जा रही टीवी पर आ रहे समाचार पर उसकी नजर जा रही थी,जिसमें दिखया जा रहा था कि घर में काम करने वालो को लॉक डाउन में हटाने की बात बताया जा रहा था।काम करने के बाद जब कामिनी अपने घर पहुची,तब अपने पति को घर पर पाकर उससे पुछने लगी की आज बहुत पहले घर आ गए, लॉक डाउन में कोई सवारी नहीं मिला। पति बोला की अब मैं रिक्शा ले कर नहीं जाउंगा,पुलिस वालो ने बोला है कि अब रिक्शा लॉक डाउन खुलने के बाद ही चलाना,नहीं तो जेल में बंद कर देंगें। कामिनी सहम गई और बोली अब पता नहीं हम गरीबो का क्या होगा।आज मालिकिन के यहॉ भी टीवी पर समाचार में बताया जा रहा था कि घर पर काम करने वालो को हटा दें।हे भगवान हम दोनो के कमाने के बाद भी अभी तो पुरा खाना हम लोग नहीं खा पाते अगर मेरा भी काम छुट जाएगा तो हम लोगों का तो क्या होगा।कल सुबह कामिनी अपने समय पर सिन्हा जी के घर पहुॅची गई। सिन्हा जी के पत्नी ने घर के बाहर ही कामिनी के हाथ पैर धुलवाया। कामिनी मालिकिन के कहें अनुसार काम करती रहीं।घर पर पहुॅच कर कामिनी ने अपने पति से कहा कि मालिकिन ने मुझे आज बहुत काम करवाया पर हटाने की बात नही की लगता है वह मुझे नहीं हटाईगी।कामिनी के दोनो बच्चे रात में रोने लगे पुछने पर पता चला की दोनो को दुध चाहिए था,जो कि घर में नही था,बच्चो को कामिनी ने चावल के पानी मे चीनी मिलाकर दुध बताकर पिला दिया,अबोध बच्चे वही पी कर चुप हो गए।फिर नई सुबह कामिनी काम पे वह सिन्हा जी के यहॅा पहुॅच गई। सिन्हा जी के बच्चे दुध नही पी रहे थे,उनकी मॉं उनके पिछे दुध ले कर दौड़ रही थी। कामिनी यह देख कर भगवान से कह रही थी कि मेरे बच्चो ने क्या अपराध किया था कि उन्हे दुध भी नही मिल पाता है।फिर कामिनी अपने काम में भिड़ गई।आज मालिकिन कामिनी को डांट भी नहीं रही थी,जो प्रतिदनि का दिनचर्या था। कामिनी को अचम्भा लग रहा था।काम खत्म हाने के उपरांत सिन्हा जी के पत्नी ने कामिनी को उसकी पगार महिने के खत्म होने के दो दिन पहले ही दे कर बोली कि कामिनी कल से तुम काम पे मत आना ,यह सुनते ही कामिनी के पैर के नीचे की जमीन निकल गई,वह सिन्हा जी के पत्नी से बोली मालकिन मुझे मत निकालिए मेरे पति का रिक्शा भी अभी बंद है हम गरीब क्या खाएंगें। सिन्हा जी के पत्नी बोली की हम तो तुम्हें नही निकालना चाहतें है पर सोसाइटी वाले सभी काम वालो को निकालने का निर्णय ले चुके है, हम कुछ नहीे कर सकते है सिर्फ हम तुम्हें जब तक करोना वायरस का प्रभाव कम नहीं होता है तब तक आधी पगार देते रहेंगें। कामिनी यह सुन कर रो पड़ी और बोली मालकिन आप सब महान है और यह बोलते हुए अपने घर की तरफ चल दी। भगवान को कोसने के बजाए आज भगवान से विनती करने लगी की जल्द से जल्द यह करोना को यहॉ से भगा दें।लेखिका :राखी शरण।

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