मन

विषय-मन विधा लघु लेख मन एक विशाल सागर की तरह होता है जिसमें जाने कितनी लहरें पल प्रतिपल हिलोरें मारती हैं। लेकिन अगर इसकी स्थिति शांत नहीं हो तो आप किसी निर्णय पर नहीं पहुँच सकते। कभी कुछ बड़ा नहीं सोच सकते यहाँ तक की ये भी नहीं जान सकते की आप कौन हैं और क्या चाहते हैं। इसी कारण मनोविज्ञान विषय की आवश्यकता पड़ी। कहा भी गया है मन के हारे हार और मन के जीते जीत। मन ही हमें वेग प्रदान करता है और लक्ष्य को आसान बना देता है। जो काम असम्भव जान पड़ता है मनोबल के साथ किया जाये तो सम्भव हो जाता है ।मनोबल के अनेक ज्वलंत उदाहरण हमारे सामने प्रस्तुत हैं जैसे एक लड़की द्वारा अपने पिता को 800 किलोमीटर दूर साइकिल पर ले जाना ,एक अपाहिज व्यक्ति द्वारा ओलंपिक पदक प्राप्त करना आदि। यह मन ही है जो आपको आत्मबल प्रदान करता है। यह मन ही है जो आपको किसी क्षेत्र विशेष में उत्कृष्ट होने का बोध करवाता है। लेकिन हमें मन का साधक होना पड़ेगा गुलाम नहीं। जब आप मन को साधना द्वारा सही दिशा प्रदान कर देते हैं तो बड़ी से बड़ी कठिनाई आसान हो जाती है । स्वरचित और मौलिक रचना राकेश कुमारमहेन्द्रगढ,हरियाणा

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