मानवता

मंच को सादर नमन विषय :- मानवता विधा :- लघुकथादिनांक :- 09/06/2020दिवस :- मंगलवारबहुत समय पहले की बात है जब एक जवान जम्मू कश्मीर में स्थानान्तरित हुआ। इसी दौरान उसकी भेंटछोटू से हुई जो की एक नवयुवक था और उसे सेना द्वाराएक दिवार बनाने हेतु बुलाया गया था। बातों ही बातों में जवान ने छोटू के बारे में बहुत कुछ जान लिया। एक दिन काम करते वक्त छोटू को चोंट लग गयी। जवान ने उसे कंधे पर बिठा़या और सेना चिकित्सक की और दौड़ लगा दी। छोटू उसे बड़ी प्रश्न भरी नजरों से देख रहा था। इस घटना ने उसकी फौज के प्रति उसकी सोच को बदल के रख दिया। काफी समय बीतने के बाद वह जवान सेवानिवृत्त हुआ और बाबा बर्फानी के दर्शन करने के लिए गया। तभी किसी ने पीछे से पीठ पर हाथ रखा और बोला साहब पैदल ही चढोगे खच्चर नहीं चाहिए? जवान ने पीछे मुड़कर देखा तो सामने छोटू खड़ा था।दोनों मिलकर बहुत खुश हुए। जब छोटू सामान उतार रहा था तो जवान ने पूछा कितने पैसे हुए? तो छोटू ने कहा मैं देश के सैनिकों से पैसा नहीं लेता। क्यों ऐसा क्या है भाई? आप लोग हमारे लिए मरते हो हम आपके लिए इतना भी नहीं कर सकते! छोटू आज भी जवानो से पैसे नहीं लेता।शिक्षा -मानवता ही सच्चा धर्म है राकेश कुमार महेन्द्रगढ,हरियाणा मो :- 6005479067

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