नन्हीं। बूँदें किरण कपूर गुलाटी

बरस रही बूँदें छम छम छाए बदरा कारे कारे पिया मिलन को जाए बिजुरिया धरती बैठी माँग सँवारे बोले पपीहा महके तन मन चटखें कलियाँ बेला की कोमल चलें कभी जो ठँडी हवाएँ लहराएँ आँचल केश उड़ाएँ सखी चँचल जैसे कोई खेल रचाय मुसकाए रात की रानी भी भीनी भीनी सुगन्ध फैलाए पीहू पीहू की मधुर स्वर लहरी गूँजे वन में तान सुनाए बरस रही बूँदें छम छम कारे कारे बदरा छाए दूर कहीं नज़र जो घूमी नाचें मोर पँख फैलाए विभोर हुए मेरे चँचल नैना कैसे कैसे दृष्य दिखाए कलाकार की कला निराली हर पल नए चित्र बनाए शत शत नमन उस कारीगर को धरती आसमाँ जिसने बनाए छम छम बरसें नन्हीं बूँदें कारे कारे बदरा छाए

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4 Comments

  1. vijaykr811 vijaykr811 09/06/2020
  2. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 09/06/2020
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/06/2020
  4. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 11/06/2020

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