पैमाना

मंच को सादर नमन विषय -पैमाना मानता हूंँ तुझे बहुत सताता हूँ मैं लेकिन तुझे ही तो अपना बताता हूँ मैं अच्छी लगती है तेरे चेहरे की लाली वरना कहाँ चाहत इतनी जताता हूँ मैं रूठने से तेरे रूठ जाती है ज़िन्दगीइसलिए हर नज्म तुझ पर बनाता हूँ मैं जैसे लौट आई हो फिर सदा बहार की बन मयूर तेरी यादों में नाचता गाता हूँ मैं पैमाने से नहीं तेरी आँखों से पीता हूँ हर घूंट में तेरा असर पाता हूँ मैं जो भी हो दिल में बोल दिया करो मुझेरोज रोज कहाँ लबों पर आता हूँ मैंराकेश कुमार महेन्द्रगढ,हरियाणा

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6 Comments

  1. deveshdixit DEVESH DIXIT 05/06/2020
  2. rakesh kumar Rakesh Kumar 08/06/2020
  3. vijaykr811 vijaykr811 09/06/2020
  4. rakesh kumar Rakesh Kumar 28/06/2020
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 06/07/2020
  6. rakesh kumar Rakesh Kumar 16/09/2020

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