आत्मनिर्भर भारत

दिनांक-4/6/2020, गुरुवारविषय- आत्मनिर्भर भारतआत्मनिर्भर भारत शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है। आज हम अगर बात करें समय की तो आजादी के पहले से ही हम स्वदेशी-स्वदेशी चिल्ला रहे हैं । लेकिन उसे अपने आचरण में नहीं उतार पाए।आज का इंसान इतना महत्त्वकांक्षी हो गया है की वह ना भविष्य देखता है ना देश।उसके लिए किफायती चीजें ही भगवान हैं। अपनी किसी आदत को बदलने के लिए तैयार नहीं एवं सरकार को गाली देने में सदा आगे रहता है।हमने अपने पड़ोसी चीन से भी नहीं सीखा की सस्ती चीजें कैसे तैयार की जाएं। हमने बना बनाया ही अपना लिया। यहाँ तक जो हमारी मूर्ति मिट्टी की होती थी अब फ़ाइबर में बदल चुकी है। हम कभी नहीं सोचते मोहक खिलौने हम भी बना सकते हैं जो चीन बनाता है। हमारी जेब में पैसा हो तो फिर हम सिर्फ अपने दिल की सुनते हैं। लेकिन भूल जाते हैं इसी पैसे की बदौलत हमारा दुश्मन आज फिर से लद्दाख में हमारी छाती पर बैठा है। कब तक हम आँख बंद कर दुश्मन देश की जेब भरते रहेंगे। जब तक इंसान की जरूरत बाहर से पूरी होती है वह खुद कुछ बनाने की कोशिश नहीं करता। अतः हमको चाहिए की अपनी नीतियों में बदलाव करें और देश को विभिन्न रूपों से सम्पन्न बनाने की कोशिश करें। राकेश कुमार महेन्द्रगढ,हरियाणा

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