माहिया विधा रचना – डी के निवातिया

१.आना मेरे साजन,खुशियों की डोली,लेकर मेरे आँगन !!
२.जिस दिन तू आएगा,झूमेगा ये मन,नाचेगा, गाएगा  !!
३.जब मेरी सजे डोली,रात दिवाली कीदिन में होगी होली ।।४.दर्शन को मैं तरसीसावन भादों सी,निर्झर आंखें बरसी।।५.जब मैं आहें भरतीयाद तेरी मीठी,मेरी पीड़ा हरती ।।६.मेरे मितवा तुम हो,खोए खोए सेकिन सपनो में गुम हो।।७.झिलमिल मेरा आंगन,तेरी खुशबू से,हो जाए मन पावन ।।८.घूंघट में है चेहरा,देखूं मै कैसे,तेरे मुख भी सेहरा ।।९.नयनों से नयन मिले,बदन हुई हलचल,मन उपवन पुष्प खिले ।।१०.हम तुम दोनों यारा,चल और कही चलहो अपना घर न्यारा  ।।
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डी के निवातिया

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