पानी की जरूरत है गर्म तपती धूप में

पानी की जरूरत है गर्म तपती धूप मेंमौसम दहका हुआ है गर्म बरसती धूप मेंना नदियों की कल कल, ना तालाबों में पानी आजकलमौसम बदला है या बदली इंसा की खुदगर्जी धूम सेजल ही जीवन है तो फिर, क्यों ना जल का जीवन हैकरले मीत अब कल कल नदियों की बजती धुन सेज़हर घोलते, मौसम बदलते, ना बादल बरसतेपलपल शहरों की समृद्धि की उड़ती धूम सेबढ़ती वाहनों की कतारें, हर और प्रदूषण के नजारेंभीड़ बढ़ती मरीजों की मौसम बदलती शूल सेपेड़ मरते, पहाड़ लूटते, मरुस्थल की यहां बहार हैनया मौसम नई रूत आयी यहां उड़ती धूल सेरात गर्मी की फरागत, ना सावन भादों की हरारतमौसम बदला इतना कि तितली बिछड़ी फूल सेना पहाड़ो में पानी है, ना झरनों में अब जारी हैनदियों की धारा भी अब कहाँ चलती अपनी धुन सेमौत हुई नदियों की, अब आई बारी बजरियों कीमौसम ने रंग बदला बनी शहरों की प्रगति खून सेखो गये गांव के पनघट, सुख गये है सारे घटअब ना माना इंसा, मिट जायेगी तेरी हस्ती मूल सेसमझ जा अब “आबिद” कर तौबा जो काम किये साबितबदलेगा मौसम तो जगमगायेगी धरती धूम से

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  1. Gulam mustafa 30/05/2020

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