गीत

नमन मंचदिनांक.. 28/05/2020बिषय.. गीत मुखड़ा हमने भी कभी एक समंदर गोते खाते देखा था एक रूदाली के सपनो में हंशते गाते देखा था अंतरा 1बड़ा विकट सा बहुत सघन था उसका मखमल जैसा मन था अपने ही किनारों पर कश्ती खुद को डुबाते देखा था अंतरा 2जलती तपती इस धरती पर आंधी तूफ़ान बारिश गिरती पर अपने बिखरे अरमानो परहल को चलाते देखा था अंतरा 3अपने मकान की जमीन पर बिक गया वो इस यकीन पर अपनी ही फसल के दाने किसी ओर को खाते देखा था राकेश कुमार हरियाणा

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