“भारत का मीडिया”

कहते है जिसे खबरों कि चिडिया,नाम है उसका भारत का मीडिया,खबरों के भवंडर मे रहता ये सदा,ब्रेकिंग न्यूज से कभी न हो पाऐ ये जुदा |जनतंत्र का चौथा स्तंभ ये कहलाता,जनसामान्य की बात ये सुनाता,गरीबों की आवाज बनकर सत्ता से ये भिड़ जातालोकतंत्र को एकतंत्र मे ये समाये रखता |दिन प्रति दिन ये तगड़ा होने लगता,जनता की आवाज को ये दबाते चले जाता,सत्ता के सुर से सुर मिलाने लग जाता,जमिनी मुद्दों की बात ये भुलाता चले जाता |TRP से इश्क बेहद करने लगता,दिन रात इसका पिछा करता जाता,TRP के शिखर पर भी ये पोहोच जाता,मानो इश्क मे बावला होने लगता |सूत्रों से इसका पुराना नाता,खबरों को ये इन्हीं के हवालों से बताता,कामचोरी से बाज न आता,क्योंकि रिपोर्टिंग करने मे पसीना छुंट जाता |स्टूडियो का ये मंजर नया लाता,पत्रकार की परिभाषा बदल देता,ऐंकर का ये दैर नया लाता,जो मेकअप से लतपत हुये रहता |शाम का समय इसे खुब भाता,क्योंकि डिबेट का समय होने जाता,दिल्ली के चार बेवकूफो को ये बुलाता,और आम जनता का खुन खौलाता |उम्मीद की किरण कही नजर न आती,जनता की आँखों को काली पट्टी बांधी जाती,सोचने की ताकत खत्म कर दी जाती,और मीडिया की दुकानें भरती जाती |लेकिन इन सडे आमों में ,कुछ अच्छे भी निकल आते,जो लोकतंत्र की पर्वा कर पाते,सत्ता से कठिन सवाल पूछ पाते |आज के इस दौर मे,जो निपक्ष होकर पत्रकारिता कर पाता है,जनता की आवाज बनकर बेबाकी दिखा पाता है,वही भारत का सच्चा मीडिया कहलाता है ||

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