अफवाह

नमन मंचदिनांक 27/05/20दिन बुधवारविधा गीत विषय : अफवाह मुखड़ाये अफवाह रही अभी तक तेरे शहर की गलियों में मैं तुझे भूल गया हूँ साथी शहर की रंगरलियों में अंतरा 1अभी जी भरकर भी ना देखा मैंने तुझे यहाँपर बता छोड़कर के जाऊँ ये दौलत तेरी कहाँ पर तू रहता है धड़कते दिल में तू रहे सब कलियों में ़़़़़़मुखड़ाये अफवाह रही अभी तक तेरे शहर की गलियों में मैं तुझे भूल गया हूँ साथी शहर की रंगरलियों मेंअंतरा 2ये काम है इस दुनिया का औरों का दिल दुखाना कब सह सका कहीं भी चाहतों को ये जमाना तुझे ले चलुँगा छुपाकर दूर कहीं परियों में मुखड़ाये अफवाह रही अभी तक तेरे शहर की गलियों में मैं तुझे भूल गया हूँ साथी शहर की रंगरलियों मेंअंतरा 3तेरी बाहों में है मेरी आरजूओं का ठिकाना मुझे सांझ तक यहीं पर आखिर है लौट आना कहाँ जाऐगा भ्रमर लौट आऐगा कलियों में मुखड़ा ये अफवाह रही अभी तक तेरे शहर की गलियों में मैं तुझे भूल गया हूँ साथी शहर की रंगरलियों मेंराकेश कुमार

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply