अंगार – शिशिर मधुकर

कौन है जिसको यहां ना प्यार की दरकार है गर मुहब्बत ना मिले ये जिंदगी बेकार है जो अकेले चल रहे हैं मंजिलों की खोज में थक गए उनके कदम और घट गई रफ्तार है अजनबी सा हो गया है अपने घर में आदमी दो दिलों के बीच में गर खिंच गई दीवार है दूसरों के बोझ ही बस ढो रहा इंसान अब जिंदगी ने कर दिया उसको बहुत लाचार है बोलता है वो कटु तुमने तो बस ये कह दिया मधुकर कहीं दिल में छुपा उसके बड़ा अंगार है शिशिर मधुकर

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