सुलह – शिशिर मधुकर

अब याद आएगी तुमको फिर से हमसे सुलह की जब तक रहे साथ हम तुम चिंता नहीं थी फतह की जन्नत का कोना हो चाहे घर हो खुदा का जमीं पे तू जो अगर साथ ना हो कीमत नहीं उस जगह की लाखों हसीं हैं जहां में पर तुम में कुछ है अनोखा मुस्कान दिखती नहीं है दुनिया में तेरी तरह की तेरा असर क्या बताएं इतना ही बस तू समझ ले जीवन में हरदम हमारे तू रोशनी है सुबह की धड़कन में है नाम तेरा इसका तुझे भी पता है मधुकर को ना जानकारी लेकिन इसकी वजह की शिशिर मधुकर

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